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सिद्धार्थनगर में गुंडाराज: ₹55 की शराब ₹70 में, आबकारी विभाग की चुप्पी या खुली भागीदारी?

मिश्रौलिया पुलिस के साए में 'ओवररेटिंग' का काला खेल, चेतिया में सरेआम लुट रही जनता!

अजीत मिश्रा (खोजी)

सिद्धार्थनगर: आबकारी विभाग की नाक के नीचे ‘अवैध वसूली’ का नंगा नाच, ₹55 की शराब ₹70 में!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • साहब सो रहे, सेल्समैन लूट रहे: सिद्धार्थनगर में आबकारी नियमों की उड़ी धज्जियां, कौन है इस अवैध वसूली का ‘आका’?
  • शराब के अड्डों पर ‘पंद्रह की लूट’, क्या विभागीय संरक्षण में फल-फूल रहा है गोरखधंधा?
  • भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा आबकारी विभाग: चेतिया में तय रेट से ₹15 ज्यादा वसूल रहे शराब माफिया, डीएम की कार्रवाई का इंतज़ार!

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के मिश्रौलिया थाना अंतर्गत चेतिया में नियम-कानून कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। यहाँ देशी शराब के ठेकों पर ‘ओवररेटिंग’ का काला खेल पूरी दबंगई के साथ चल रहा है। प्रिंट रेट से कहीं अधिक दामों पर शराब बेचना अब यहाँ की नियति बन चुकी है, और ताज्जुब की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग धृतराष्ट्र की भूमिका में हैं।

नियमों की धज्जियां: जेब पर डाका, सरेआम लूट

​स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस देशी शराब के पव्वों की सरकारी कीमत ₹55 निर्धारित है, उसे बेखौफ होकर ₹70 में बेचा जा रहा है। प्रति शीशी ₹15 की यह अवैध वसूली न केवल गरीब मजदूरों की जेब पर डाका है, बल्कि सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को भी ठेंगा दिखाना है। सवाल यह उठता है कि क्या इन सेल्समैनों के पास कोई ‘अदृश्य कवच’ है जो इन्हें कार्रवाई के डर से मुक्त रखता है?

खाकी और आबकारी की ‘मौन सहमति’ पर उठते सवाल

​ग्रामीणों का खुला आरोप है कि मिश्रौलिया पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत के बिना यह गोरखधंधा मुमकिन नहीं है। चेतिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं—आखिर किसके शह पर पुलिस इन अवैध गतिविधियों को अनदेखा कर रही है?

​”जब पुलिस की सुरक्षा में ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जाएं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? यह चुप्पी साफ इशारा करती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं।” — एक आक्रोशित स्थानीय नागरिक

 

प्रशासनिक चुप्पी: संरक्षण या लाचारी?

​जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की इस मामले पर रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है:

  • ​क्या सेल्समैनों से होने वाली इस अतिरिक्त कमाई का हिस्सा ‘ऊपर’ तक पहुंच रहा है?
  • ​क्या जिला आबकारी अधिकारी को अपने क्षेत्र में हो रही इस खुली लूट की भनक तक नहीं है?
  • ​आखिर कब तक विभागीय संरक्षण में यह अवैध उगाही जारी रहेगी?

अब कार्रवाई का इंतज़ार

​सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक अब यह चर्चा आम है कि सिद्धार्थनगर में आबकारी विभाग सिर्फ नाम के लिए रह गया है। अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद क्या जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा? क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या फिर जांच के नाम पर हमेशा की तरह खानापूर्ति कर दी जाएगी?

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